
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद एआईसीटीई प्रायोजित एआईसीटीई-वाणी कार्यशाला का ऑफलाइन/भौतिक रूप से आयोजन करने जा रहा है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यशाला “स्मार्ट सिटीज़ और इंटेलिजेंट मोबिलिटी में तकनीकी नवाचार” शीर्षक से पूरी तरह हिंदी में 18 से 19 नवंबर 2025 तक चलेगी।
कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. आशुतोष दीक्षित ने कहा कि यह दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में उन्नत तकनीकी विमर्श को भारतीय भाषाओं के संवर्धन के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्मार्ट सिटी पारिस्थितिकी तंत्र तथा शहरी गतिशीलता के तेजी बदलते क्षेत्र की समग्र समझ प्रदान करना है। प्रतिभागी यह गहन जानकारी प्राप्त करेंगे कि तकनीकी प्रगति शहरी जीवन को कैसे नया रूप दे रही है, सतत विकास को सक्षम बना रही है तथा बुद्धिमान बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दे रही है। नवाचार व शहरी नियोजन के परस्पर संबंधों की खोज से यह कार्यक्रम शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा छात्रों को भारत के डिजिटल रूप से सशक्त एवं समावेशी स्मार्ट सिटीज़ के दृष्टिकोण में सार्थक योगदान देने हेतु तैयार करेगा।
कार्यशाला समन्वयक डॉ. परुल तोमर ने आगे बताया कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटीज़ मिशन तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बहुभाषी तकनीकी शिक्षा पर बल के अनुरूप यह पहल ज्ञान प्रसार में पहुंच को रेखांकित करती है। एआईसीटीई-वाणी ढांचे के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करती है, जिससे अत्याधुनिक अवधारणाएं भाषाई बाधाओं के बिना व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकें। हिंदी को माध्यम बनाने का निर्णय तकनीकी शिक्षा को लोकतांत्रिक बनाने तथा विविध क्षेत्रीय एवं भाषाई पृष्ठभूमि से भागीदारी को प्रोत्साहित करने का सचेत प्रयास है।
कार्यशाला की सह-समन्वयक डॉ. अश्लेषा गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला में ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों द्वारा संचालित इंटरैक्टिव सत्र होंगे, जिनमें स्मार्ट सिटी ढांचे व डिजिटल बुनियादी ढांचा, बुद्धिमान परिवहन प्रणालियां व यातायात प्रबंधन, एआई-संचालित शहरी नियोजन रणनीतियां तथा आईओटी-सक्षम नागरिक प्रौद्योगिकियां व स्वचालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल होंगे। पैनल चर्चाओं, केस स्टडीज़ तथा तकनीकी प्रदर्शनों के माध्यम से प्रतिभागी इन प्रौद्योगिकियों के वास्तविक अनुप्रयोगों तथा भीड़भाड़, प्रदूषण, संसाधन अनुकूलन एवं नागरिक-केंद्रित शासन जैसी शहरी चुनौतियों के समाधान की संभावनाओं की खोज करेंगे।
देशभर के फैकल्टी सदस्यों, शोध छात्रों, उद्योग पेशेवरों तथा छात्रों के लिए भागीदारी खुली है। पंजीकरण अनिवार्य है तथा इच्छुक व्यक्ति विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट या कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग से सीधे संपर्क कर सकते है। यह कार्यशाला कल के स्मार्ट सिटीज़ के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध हितधारकों के बीच ज्ञान विनिमय, नेटवर्किंग तथा सहयोग का अनूठा अवसर प्रदान करती है।
