
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / सैक्टर -21 बी स्थित जीवा पब्लिक स्कूल के लिए आज का दिन बहुत विशेष रहा, बेल्जियम और फ्रांस से आए शिक्षकों ने जीवा पब्लिक स्कूल का दौरा किया, शिक्षकों के दल ने जीवा लर्निंग सिस्टम को समझा और अपने देशों में इसके दृष्टिकोण को लागू करने की इच्छा जताई।
शिक्षकों के दल ने जीवा की अनूठी शिक्षण पद्धति की सरहाना की जिसमें चरित्र निर्माण, जीवन जीने की कला, स्वाध्याय करके सीखो इत्यादि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जीवा का शिक्षण मॉडल एकेडमिक विकास के साथ – साथ छात्रों के मानवीय, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास पर भी केंद्रित है।
विद्यालय के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान, शिक्षकों और छात्रों ने अतिथियों को जीवा के विभिन्न स्किल लैब्स, आयुर्वेदिक जीवन शैली, चरित्र निर्माण प्रोग्राम से परिचित कराया। इस दल ने छात्रों के साथ संवाद कर उनके अनुभव भी साझा किए और विद्यालय की समग्र शिक्षण पद्धति की प्रशंसा की।
इस दौरे में कोच नतालिया समेत लाडीली, पैट्रिशिया, क्रिसटिरिया उपस्थित रहीं।
इस दल में शामिल लाडीली ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि ‘जीवा के छात्र वास्तव में सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें ऐसे शिक्षण वातावरण में सीखने का अवसर प्राप्त होता है, जो भारतीय मूल्यों, संस्कृति और नैतिकता की पवित्र भावना से परिपूर्ण है। यदि हमें भी अवसर मिले, तो हम अपने बच्चों को इसी विद्यालय में शिक्षा दिलाना पसंद करेंगे, क्योंकि यहाँ न केवल ज्ञान दिया जाता है, बल्कि जीवन के आदर्श भी सिखाए जाते हैं। आप सब विदेशों जैसे पेरिस आदि में सुख और आनंद खोजने न जाएँ, क्योंकि सच्चे मूल्य, नैतिकता और वास्तविक खुशी तो यहीं भारत की मिट्टी में हैं, जिन्हें हम आपके विद्यालय में सीखने और अनुभव करने आए हैं।’
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान के साथ उपाध्यक्षा श्रीमती चंद्रलता चौहान एवं एकेडमिक हेड श्रीमती मुक्ता सचदेव भी उपस्थित रहीं विद्यालय के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान ने सबको संबोधित करते हुए कहा कि — जीवा लर्निंग सिस्टम केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। हमें गर्व है कि आज विदेशी प्रतिनिधि भी हमारे इस भारतीय मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि – मूल्य और ज्ञान हर व्यक्ति के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, मनुष्य ने बहुत उन्नति की है, परंतु इसके साथ ही मन से शांति कहीं खो-सी गई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि हम प्रकृति के विरुद्ध जाकर जीवन जीने लगे हैं। सुविधाओं की अंधी दौड़ में हम अपने जीवन को भले ही आसान और सफल बना रहे हों, लेकिन भीतर से असंतुलित होते जा रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हमारा ज्ञान और हमारी शिक्षा एक संतुलित दृष्टिकोण विकसित करें, जो हमारे व्यक्तिगत विकास के साथ साथ संपूर्ण समाज और प्रकृति के हित में भी लाभकारी सिद्ध हो। जीवा लर्निंग सिस्टम इन्हीं सूत्रों पर आधारित है।
