
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / अरावली की पहाड़ियों से घीरे सूरजकुंड की खूबसूरत वादियों में आत्मनिर्भर भारत- स्वदेशी मेला थीम पर आयोजित किए जा रहे द्वितीय सूरजकुंड दीपावली मेला की मुख्य चौपाल पर विद्यार्थी और लोक कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। दीपावली मेला के चौथे दिन रविवार को मुख्य चौपाल पर विद्यार्थियों के साथ-साथ लोक कलाकारों ने मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों व भगवान श्री कृष्ण-सुदामा नाटक के माध्यम से मेले में समा बांधते हुए रंग जमा दिया। भगवान श्री कृष्ण-सुदामा नाटक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हुए आपस में प्यार-प्रेम व भाईचारे से रहने और सबको एक समान समझने का संदेश दिया गया। कलाकारों ने दुनिया में हो गया नाम म्हारे हरियाणे का नृत्य पर मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया।
हरियाणा सरकार और हरियाणा पर्यटन निगम की ओर से मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन और पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा के निर्देशन में सूरजकुंड परिसर में 7 अक्तूबर तक आत्मनिर्भर भारत-स्वदेशी मेला थीम के साथ द्वितीय सूरजकुंड दीपावली मेले का आयोजन किया जा रहा है। भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित आत्मनिर्भर भारत स्वदेशी मेला एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। सूरजकुंड में आयोजित किया जा रहा यह मेला न केवल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी स्वदेशी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को अपनाने का अवसर प्रदान कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत स्वदेशी मेला भारत की समृद्ध संस्कृतिक विरासत को संजोने, भारत की प्रगति और श्आत्मनिर्भर भारतश् की मुख्य कड़ी है।
शानदार मनोहारी प्रस्तुतियों ने मेले में लगाए चार चांद:–
दीपावली मेला में विद्यार्थियों और लोक कलाकारों द्वारा मुख्य चौपाल से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। रविवार को राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फरीदाबाद, जागृति पब्लिक स्कूल सहित अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हरियाणवी सहित अन्य लोकगीतों पर सामूहिक और एकल नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं बीन पार्टी सहित अन्य कलाकारों ने भी शानदार मनोहारी प्रस्तुतियां देकर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए मेले में चार चांद लगा दिए। इस अवसर पर हरियाणा पर्यटन विभाग के अधिकारी, स्टाफ सदस्य व दर्शकगण मौजूद रहे।
फरीदाबाद के सूरजकुंड में आत्मनिर्भर भारत-स्वदेशी मेला थीम पर आयोजित किया जा रहा दीपावली मेला हरियाणा प्रदेश ही नहीं अपितु देश के अन्य राज्यों के हस्तशिल्पियों को भी अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है। सूरजकुंड दीपावली मेले में आए ऐसे ही एक हस्तशिल्पी हैं आंध्र प्रदेश से आए दशरथ अचारी। दशरथ अचारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोक व आत्मनिर्भर भारत विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दशरथ अचारी को लकड़ी पर नक्काशी करने में महारथ हासिल है, जिसके माध्यम से वे लकड़ी पर गजब की नक्काशी करते हैं और लकड़ी को भगवान की मूर्तियों का रूप देते हैं। दशरथ द्वारा लगाई गई स्टॉल दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।
दशरथ अचारी ने बताया कि लकड़ी से मूर्तियां बनाने की कला को वुड कार्विंग कहा जाता है। वे काफी समय से इस काम को कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मूर्तियां व अन्य सामान बेशक लकड़ी से बनाया जाता हैं लेकिन ये सालों तक चलती है और इनकी चमक भी सालों-साल बरकरार रहती है। मूर्तियां बनाने में संगवान, महागनी आदि लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है। नक्काशी से लकड़ी पर तराशे गए भगवान श्री गणेश, भगवान बुद्ध, भगवान श्री कृष्ण, श्री वैंकटेश्वर, भगवान श्रीहरि विष्णु और तिरुपति बालाजी की मूर्तियां व अन्य सामान लोगों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
मेहनत का काम है वुड कार्विंग :
दशरथ ने बताया कि उन्हें वुड कार्विंग कला उनके पिता से विरासत में मिली है। वे काफी समय से वुड कार्विंग यानी लकड़ी से मूर्तियां व अन्य सामान बनाने का काम कर रहे हैं। इस काम में बहुत मेहनत लगती है क्योंकि इसमें मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। बल्कि मूर्तियां और अन्य सामान हाथ से ही बनाया जाता है। इसमें काफी समय भी लग जाता है। क्योंकि पहले लकड़ी को काटा जाता है फिर सुखाया जाता है। हाथ से ही इन पर ड्राइंग की जाती है। फिर उसकी कटिंग करते हुए तराशा जाता है. तब जाकर ये खूबसूरत मूर्तियों का रूप लेती हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने इस पुश्तैनी काम को आगे बढ़ना चाहते हैं। वे दीपावली मेला में विभिन्न देवी-देवताओं व अन्य प्रकार की 1 फीट से 6 फीट तक की लकड़ी की मूर्तियां लेकर आए हैं। दशरथ बताते हैं कि 6 फीट की एक प्रतिमा को बनाने में करीब 6 महीने का समय लगता है।
मेले के सांस्कृतिक मंच पर “वॉयस ऑफ पंजाब 2013” के विजेता गायक दीपेश राही ने अपनी दमदार और भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। दीपेश राही की प्रस्तुति मेले की प्रमुख आकर्षणों में से एक रही, जिसने पारंपरिक और आधुनिक संगीत का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
श्री राही ने मंच पर आते ही कार्यक्रम की ऊर्जा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया। उन्होंने एक के बाद एक सुपरहिट गानों की प्रस्तुति दी, जिसमें “सामने होवे यार ते नाचना पैंदा है”, “कजरा मोहब्बत वाला”, “गुड़ नाल इश्क मिठ्ठा”, “चिट्टे सूट ते दाग पे गए”, “न जाई पीरा दे डेरे मस्त बना देंगे बिबा”, “डॉलर वांगू नी नाम सदा चलदा”, “दो गल्ला करिए बैजा”, “दिल चोरी साडा हो गया” और “ये जो हल्का हल्का सुरूर है” जैसे गानों ने उपस्थित जनसमूह को झूमने और गुनगुनाने पर विवश कर दिया।
श्रोताओं में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ दीपेश राही का स्वागत किया। उनके गीतों ने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं किया, बल्कि मेले में उपस्थित हर वर्ग के श्रोताओं को एक भावनात्मक और संगीतमय अनुभव प्रदान किया।
