
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे/ डीएवी शताब्दी कॉलेज, फरीदाबाद के पर्यटन विभाग के विद्यार्थियों ने हाल ही में उत्तराखंड राज्य की प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों का भ्रमण किया। यह यात्रा विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा थी, जिसमें 37 विद्यार्थियों और 2 अध्यापकों ने भाग लिया। इस यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति, स्थायी पर्यटन और इको-टूरिज्म से जुड़ी जानकारी देना था।
यात्रा का मुख्य आकर्षण नाग टिब्बा ट्रैक रहा, जो लगभग 9,915 फीट (3,022 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। यह ट्रैकिंग पंतवाड़ी गांव से शुरू हुई और रात 3 बजे कैंप से निकलकर लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय की गई। हिमालय की गोद में बसे इस क्षेत्र में विद्यार्थियों ने देवदार, बाँज, बुरांश और चीड़ जैसे वृक्षों की सुंदरता देखी। इस क्षेत्र में कस्तूरी मृग, हिमालयी मोनाल (राज्य पक्षी), लाल लोमड़ी और पहाड़ी कबूतर जैसे जीव-जंतु भी पाए जाते हैं, जो जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं।
यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत रोमांचक और साहसिक अनुभव रही। इसके पश्चात सभी ने मसूरी के निकट धनौल्टी का भ्रमण किया और वहां सुरकंडा देवी मंदिर तक ट्रैकिंग की, जो समुद्र तल से लगभग 8,697 फीट (2,651 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर से पर्वतीय घाटियों का दृश्य अत्यंत मनोहारी था।
इस यात्रा में सुश्री स्नेहलता जी भी शामिल रहीं, जिन्होंने विशेष रूप से छात्राओं की देखभाल और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विद्यार्थियों और उनके टूर इंचार्ज ने ट्रैकिंग मार्ग और मंदिर परिसर में फैले प्लास्टिक, रैपर्स व अन्य कचरे को एकत्रित कर साफ किया और उसे उचित स्थान पर डंप किया। उन्होंने इस कार्य की वीडियो रिकॉर्डिंग कर आम जन, पर्यटकों और प्रशासन से अपील की कि वे इन प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करें।
विद्यार्थियों ने देहरादून, मसूरी और हरिद्वार का भी भ्रमण किया। हरिद्वार में गंगा स्नान करने के बाद सुबह साढ़े पाँच बजे प्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लिया, जो सभी के लिए आध्यात्मिक रूप से बेहद प्रभावशाली अनुभव रहा।
यह यात्रा पूरी तरह शैक्षणिक और शोध आधारित थी, जिसमें विद्यार्थियों ने प्रश्नावली के माध्यम से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और अन्य हितधारकों से बातचीत कर इको-टूरिज्म से जुड़े विषयों पर डेटा संग्रह किया।
इस पूरी यात्रा का सफल संचालन पर्यटन विभागाध्यक्ष श्री अमित कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन, आवास, परिवहन और सभी व्यवस्थाओं को कुशलता से संभाला। उन्होंने बताया कि अब तक विभाग द्वारा 53 शैक्षणिक यात्राएं पूरी की जा चुकी हैं, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मददगार रही हैं।
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अर्चना भाटिया ने इस यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि डीएवी कॉलेज हमेशा विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावहारिक विकास के लिए इस प्रकार की गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग विद्यार्थियों की रुचि और कोर्स की मांग के अनुसार नए प्रोजेक्ट और अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम तैयार करता रहता है।
इस प्रकार की यात्राएं न केवल विद्यार्थियों को व्यावसायिक जानकारी देती हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति से जुड़ाव, टीम भावना, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की सीख भी प्रदान करती हैं।
