
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / स्टेम सेल मानव के शरीर के रक्त में एक छुपा हुआ एक तत्व है और वह तत्व कई लाखों इकाई में पाया जाता है, जिसका कुछ अंश (मात्र 5 से 8 प्रतिशत) अगर दान कर दिया जाय तो थेलासेमिया और रक्त कैंसर से ग्रसित मरीजों को पूर्णतया ठीक कर देता है। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दान करने से पूर्व स्टेम सेल को (Boost) विकसित कर दिया जाता है अतः स्टेम सेल दान कर देने से किसी तरह की कोई कमी नहीं होती है।
स्टेम सेल का एक मिलान होता है बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के परिवार के लोगों से जिसके चांस 25 प्रतिशत तक हो पता है, अतः बाकी मरीज अनरिलेटेड दान दाता पर निर्भर होते है। इस तरह के मिलान HLA (Human Leukocye Antigens) से होता है, और HLA का मिलान बहुत मुश्किल से होता है। कई लाख लोगों का HLA मिलान करने से किसी एक का ही मिलान होना संभव होता है इसलिए आवश्यकता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग स्टेम सेल दान दाता का पंजीकरण करवावे और इसीलिए सभी मानव सेवा में कार्य करते संस्थानों से निवेदन किया जाता है कि इस जीवन रक्षण परियोजना में भागीदारी देने का मन बनावे ।
स्टेम सेल दान दाता पंजीकरण बहुत सरल है, दान दाता से एक फॉर्म भरवाया जाता है और मुह से दोनों तरफ से सलिवा लिया जाता है, यह सलिवा भारत के सबसे बड़ी स्टेम सेल दान दाता रेजिस्ट्री है, उसको भेज दिया जाता है, जहां पर लैब टेस्ट कर सलिवा के डाटा विश्व कि स्टेम सेल मिलान की रेजिस्ट्री अमेरिका में भेज दिया जाता है जहां पर लेने वाले और देने वाले के विवरण उपलब्ध है और अगर किसी का HLA मिलान हो जाता है तब वास्तविक दान कि प्रक्रिया प्रारंभ होती है। उस समय दान दाता से संपर्क किया जाता है और उसे बताया जाता है कि उसेक स्टेम सेल का मिलान किसी बीमार के व्यक्ति से मिल गया है और उससे पुनः स्वीकृति प्राप्त की जाती है, फिर उसकी स्वास्थ्य की जांच की जाती है कि पंजीकरण करने से फाइनल स्वीकृति प्राप्त होने तक दान दाता स्वस्थ है या नहीं। यह होने के उपरांत दान दाता को उसके निवास स्थान के ही किसी अस्पताल में बुलाया जाता है और वहीं पर वास्तविक दान होता है, हाँ इसमे करीब 4 से 5 घंटे का समय लगता है। और दान दाता के स्टेम सेल बीमार व्यक्ति के शरीर मे बोन मैरो के माध्यम से अंदर प्रवेश करवाया जाता है और वह बीमार व्यक्ति पूर्णतया स्वस्थ हो जाता है।
इससे से बड़ी कोई निस्वार्थ सेवा नहीं है कि दान करते समय दान दाता को नहीं पता होता है कि किस व्यक्ति को उसके स्टेम सेल दिये जा रहे हैं (यानि इस हाथ दे और दूसरे हाथ को पता नहीं लगे कि युक्ति सार्थक होती है। हाँ 1 वर्ष के अंतराल पर स्टेम सेल दान दाता और प्राप्त कर्ता के मिलन की व्यवस्था बनाई जाती है और वो समय बहुत भाउक क्षण होते है। (यह स्थिति होती है बाप या माँ और पुत्र या पुत्री जैसा संबंध) ।
इस स्टेम सेल के महत्वपूर्ण कार्य करने में महावीर इंटरनेशनल सोशल फाउंडेशन, फरीदाबाद (MISF) ने दात्री संस्था, चेन्नई के साथ समझौता किया है जिससे भारत में किसी स्थान पर पंजीकरण करने में कोई कठिनाई नहीं होती है।
अतः भारत के सभी मानव सेवा में संलिप्त संस्थानों से अपील कि जाती है कि सभी संस्थान अपने सदस्यों के समूह में या अपने स्थान के किसी कॉलेज में या किसी बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस में, या विश्वविध्यालय में एक gathering आयोजित करे, जहां पर MISF का प्रतिनिधि या दात्री का प्रतिनिधि पंजीकरण करने हेतु उपलब्ध हो जाएगा और वह प्रतिनिधि स्टेम सेल संबंधित सभी जानकारी देगा और किसी के संशय को भी दूर करेगा। इस संबंध में MISF स्टेम सेल निदेशक वीर योगेश मल्होत्रा (9810261137) से संपर्क कर सकते है या अधोहस्ताक्षरी से भी संपर्क कर सकते है या परियोजना निदेशक वीर उमेश अरोड़ा (9811560892) से भी संपर्क कर सकते है।
