
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
शिक्षाविदों और छात्रों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार की आवश्यकता महत्व और प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए अग्रवाल महाविद्यालय बल्लमगढ़ के आईपीआर सेल ने 29.4. 2022 को एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस अवसर पर सी.ए. मनमोहन खेमका मुख्य वक्ता थे और कार्यशाला के संरक्षक और महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। कार्यशाला के संयोजक डॉ. मनोज शुक्ला ने मुख्य वक्ता सी.ए. मनमोहन खेमका और प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता और सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता ने अपने परिचयात्मक नोट में बताया कि आईपीआर की आवश्यकताएं रिसर्च में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में बहुत से प्रोफेसरों ने अपने कार्य को आईपीआर के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन करवाया हुआ है। उन्हे बताया कि आईपीआर के द्वारा आप कैसे विकास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरा विश्वास है कि सी.ए. मनमोहन खेमका का विशाल अनुभव और ज्ञान महाविद्यालय के शिक्षकों को आईपीआर की प्रक्रिया और महत्व को सिखाने में मदद करेगा। कार्यशाला में मुख्य वक्ता सी.ए. मनमोहन खेमका ने आईपीआर के विभिन्न प्रकारों के बारे में बताया। मुख्य वक्ता ने बताया कि भारत का इतिहास आईपीआर में सबसे मजबूत रहा है। उन्होने बताया कैसे आईपीआर का प्रभाव जीडीपी पर पड़ता है और जीडीपी का प्रभाव कैसे किसी अर्थव्यवस्था के विकास पर पड़ता है। उन्होंने विभिन्न देशों के साख्यिक डाटा के द्वारा तुलनात्मक अध्ययन करते हुए आईपीआर की महत्वता को बताया। उन्होंने बताया कि कैसे आईपीआर से पैसा कमाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शोध करने से पहले शिक्षाविदों और छात्रों दोनों को आईपीआर के नियमों को समझना चाहिए। श्रोताओं ने मुख्य वक्ता से अनेकों प्रश्न पूछ अपनी जिज्ञासा को शांत किया। कार्यशाला का समापन डॉ.शिल्पा गोयल के धन्यवाद ज्ञापन द्वारा हुआ।
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