
फरीदाबाद, जनतंत्र टुडे / साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र ( एफएलसीसी) द्वारा 13 से 15 दिसंबर तक आयोजित होने वाले त्रिदिवसीय कला, संगीत और साहित्य उत्सव ‘जश्न-ए-फरीदाबाद 4’ का शुभारंभ टाउन पार्क, सैक्टर 12 में पुस्तक मेले के साथ हुआ। सुप्रसिद्ध लेखक एवं कवि पद्मश्री अशोक चक्रधर ने फीता काटकर शुभारंभ किया I प्रधान नवीन सूद व सांस्कृतिक सचिव विनोद मलिक ने शाल ओढ़ा कर व स्मृति चिन्ह देकर सुप्रसिद्ध लेखक एवं कवि पद्मश्री अशोक चक्रधर, सुदर्शन रतनाकर व एस के भारद्वाज का स्वागत किया।
समाज और राष्ट्र में सर्वांगीण विकास लाने में अपनी भूमिका निभाने के उदेश्य से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी एफएलसीसी द्वारा आयोजित ‘फरीदाबाद पुस्तक मेले’ के उद्घाटन के बाद पद्मश्री अशोक चक्रधर ने सफल आयोजन के लिए अपनी बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा एफएलसीसी सुबह की धूप की तरह अपनी आभा बिखेरती हुई और अधिक फैले और महके।
इस पुस्तक मेले में प्रख्यात प्रकाशकों द्वारा अपनी पुस्तकों के स्टाल लगाये गये हैं। इस मौके पर पद्मश्री अशोक चक्रधर ने कहा पुस्तकें ज्ञान प्राप्ति के साथ लोगों में सामाजिक व्यवहार, संस्कार, कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों के संवर्धन में सहायक सिद्ध होती हैं। समाज और राष्ट्र में सर्वांगीण विकास लाने में अपनी भूमिका निभाने के उदेश्य से हर वर्ष एफ एल सी सी द्वारा पुस्तक मेले का आयोजन किया जाता है।
कार्यक्रम ‘चौपाल’ में पद्मश्री अशोक चक्रधर द्वारा ‘पुस्तक बनाम बाइट्स’ में परिचर्चा में अपने विचार प्रकट करते हुए बताया कि मैं बचपन से ही किताबें पढ़ता आया हूँ और काफी समय तक नियमित रूप से पढ़ता रहा, जब तक कि मेरी यह आदत छूट नहीं गई। किताबों को “उच्च” माना जाता है और जितना अधिक आप पढ़ते हैं, उतना अधिक आपका ज्ञान वर्धन होता है और समाज आपको उतना ही बेहतर देखता है। किताब के पन्ने पलटने का मजा कुछ और है। आज टैक्नोलॉजी युग में मोबाइल के बढ़ते प्रचलन के अच्छे बुरे परिणाम हमारे उपयोग पर निर्भर करते हैं। आजकल बच्चा अपनी माँ से पहले मोबाइल का चेहरा ज्यादा देखना पसंद करता है। एआई अब बहुआयामी कार्य कर रहा है पर मोबाइल सिर्फ एक साधन है पर साहित्य साधना नहीं। ईश्वर की बहुमूल्य देन दिल और दिमाग ही संवेदनात्मक विचार को जन्म दे सकता है। हम नई टैक्नोलॉजी से समांजस्य बिठायें।
इस परिचर्चा में प्रसिद्ध लिखिका सुदर्शन रतनाकर, शिक्षाविद एवं कवि एस के भारद्वाज, लेखिका एवं कावयित्री शुभ तनेजा व राष्ट्र प्रसिद्ध कवि दिनेश रघुवंशी ने भाग लिया।
सांय सत्र में महान गायकों लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी व मुकेश को एक संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम ‘भूले बिसरे गीत’ में उनके द्वारा गाये यादगार गानों को पार्श्व गायिका ऊषा टिमोथी, प्रसिद्ध गायक गोबिंद मिश्रा, प्रेम भाटिया व खुशी द्वारा अपनी सुरीली आवाज़ में बेहतरीन गानों की प्रस्तुति देंगे I
