
फरीदाबाद, जनतंत्र टुडे / ओ३म् योग संस्थान ट्रस्ट के 26वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष में दिनांक 19 नवंबर को गायत्री महायज्ञ, चतुर्वेद शतकम महायज्ञ व सवा लाख गायत्री मंत्र आहुतियों का आयोजन श्रद्धेय योगीराज जी के पावन सानिध्य में आरम्भ हुआ। यज्ञ का कार्यक्रम दोपहर 2:30 से प्रारंभ हुआ। जिसमें आर्य परिवार श्री सतपाल चौधरी एवं श्रीमती रेखा चौधरी जी का आगमन हुआ।
साधिका रेखा जी ने कहा कि आज के दौर में मर्हिषि दयानन्द जी जैसे समाज सुधारक व ऋषियों की जरुरत है, इस आश्रम में आकर ऐसा लग रहा है की योगिराज ओमप्रकाश महाराज जैसे संंत का सानिध्य हम सभी को परमात्मा की कृपा से ही प्राप्त हुआ हैं। गुण कर्म स्वभाव के आधार पर परमात्मा के अनेकों नाम है। परन्तु परमात्मा का निज मुख्य एवं सर्वश्रेष्ठ नाम “ओ३म्” ही हैं। सभी संगत को सौभाग्यशाली बताते हुए उन्होंने कहा की ऐसे स्थान ही तीर्थ होते हैं जहां आकर हम सब कुसंग से दूर होकर सत्संग में आकर अपने चित्त को सरल बनाते हैं।
स्वामी शांतानन्द जी ने कहा कि महर्षि कपिल जी ने न्याय दर्शन में आठ प्रमाण बताए जो ब्रह्म प्राप्ति में सहयोगी हैं। श्री करमचंद शास्त्री जी ने भी व्याख्यान दिया। यज्ञ में सम्मिलित हुए यजमानों ने आहूतियां प्रदान करी। विश्व के कल्याण की भावना, प्राणी मात्र के कल्याण की भावना निहित रखते हुए यज्ञ प्रार्थना की गई।
श्री योगिराज ओमप्रकाश महाराज जी ने कहा की यदि किसी भी समय हमारा आत्मविश्वास कम हो जाता है तो हमको ऊर्जा के मुख्य स्त्रोत, उस ईश्वर में अपना ध्यान लगाकर पुनः ऊर्जा से भरपूर बन जाना चाहिए। उन्होंने बताया की यह अनुष्ठान हमारे जीवन को उत्तम बनाने का अवसर है, जीवन सदा सुख से भरा नही रहता, इसमें दुख भी आते हैं, परन्तु यदि हम उस ईश्वर के समर्पण में रहते हुए जीना सीख लेंगे तो हमको सुख और दुख दोनो में संतुलन बनाना आ जायेगा, ध्यान एवं योग यही सिखाता है। हवन के बाद रामबीर आर्य प्रभाकर ने प्रभु भक्ति के गीत गाकर सबको सत्संग कीर्तन का आनन्द दिया। हवन में वैद्य मलय याज्ञिक, डा राशि, प्राचार्या अंजू, सुनील आर्य, मीनाक्षी, स्वामी ऋषिपाल, जगदीश भड़ाना, चरण सिंह भड़ाना, जगदीश, नवरत्न, देवेश, चिराग, नरेन्द्र सिंह, मंंजू, नर्मदा, कुसुम, कमलेश, संतरा आदि यजमान बने। हवन के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
