
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
डीएवी शताब्दी महाविद्यालय फरीदाबाद के भारतीय ज्ञान परंपरा सेल के सानिध्य में संस्कृत विभाग एवं बीसीए विभाग के द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयाम विषय को लेकर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के व्याख्याता प्रोफेसर सुधीर कुमार आर्य जी स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली रहे। व्याख्यान से पूर्व बीसीए विभाग द्वारा नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में लगभग 150 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
प्रोफेसर सुधीर कुमार आर्य ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा सबसे प्राचीन तथा महान है। आज विदेशों में जितनी भी खोजें हो रही हैं वे भारतीय प्राचीन ग्रंथों में पूर्व से ही उल्लिखित हैं। आधुनिक युग में पाश्चात्य जीवनशैली अपनाने से युवा पीढ़ी स्ट्रेस, एंजाइटी, डिप्रेशन आदि बीमारियों से पीड़ित होती जा रही है, लेकिन पुरातन भारत मे इस प्रकार की मनोवृत्ति देखने को नही मिलती। आज विदेशों में भी उपनिषदों को पढ़ने का प्रचलन बढ़ रहा है। भारतीय ज्ञान परम्परा वास्तव में महान है जिसे हम सभी को अवश्य जानना चाहिए। जीवन में कामयाब होने के लिए महापुरुषों की जीवनियां पढ़नी बहुत ही आवश्यक हैं।
कार्यकारी प्राचार्या डॉ अर्चना भाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में नारियों को विशेष आदर का स्थान दिया गया है। योग भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग है। यह आंतरिक,शारीरिक और आध्यात्मिक कल्याण के बहुत उपयोगी है। डॉ. भाटिया ने विद्यार्थियों को आर्य समाज के कार्यों से अवगत कराया तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती एवं महात्मा हंसराज द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों तथा बलिदानों से अवगत कराया।
इस अवसर पर डॉ मीनाक्षी हुड्डा,डॉ अमित शर्मा, मैडम रुचि,मैडम प्रिया,जाकिर हुसैन,प्रमोद कुमार तथा इ एच अंसारी जी उपस्तिथ रहे। इस व्याख्यान को लगभग 90 विद्यार्थियों ने सुना
