
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय प्रांगण में प्राचार्य डॉ. कृष्णकान्त गुप्ता के दिशा निर्देशन में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु “सफलता के मूलमंत्र” पर व्याख्यान व “आत्मनिर्भर भारत अभियान” पर एक प्रेरक वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ दीपशिखा प्रज्ज्वलन व मां सरस्वती की आराधना से हुआ।
प्रथम व्याख्यान का शीर्षक “सफलता का मूलमंत्र” रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत गुप्ता जी ने की और उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रत्येक वर्ग के लिए सफलता का अपना-अपना अर्थ है किन्तु विद्यार्थियों के लिए केवल और केवल कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी हैं। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी से अजय भाई जी, माउंट आबू से पधारे और उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम के बाद भी कभी-कभी सफलता प्राप्त नहीं होती तो उसके लिए सकारात्मक तरीके से धैर्य बनाते हुए निरंतर प्रयास जारी रखना चाहिए। साथ ही साथ उन्होंने समय प्रबंधन, लक्ष्य, धैर्य और निरंतर को अभ्यास में लाने पर चर्चा की। भाई बी.के. हरिकृष्ण जी ने मानसिक सफलता पर चर्चा की व बहन बी. के. विनेश ने ध्यान योग को सफलता व ऊर्जावान बने रहें का मूल-मंत्र बताया और विद्यार्थियों को परमात्मा के साथ संबंध बनाने के लिए प्रतिदिन का आरंभ ईश वंदना से करने को कहा। साथ ही साथ आज ही के दिन प्राचार्य डॉ कृष्ण कांत के मार्गदर्शन में वाणिज्य विभाग द्वारा “आत्मनिर्भर भारत अभियान” पर एक और प्रेरक वार्ता का आयोजन किया गया।
डॉ. कृष्णकांत गुप्ता ने मुख्य अतिथि को पौधा भेंट कर स्वागत किया। मुख्य वक्ता के रूप में श्री गंगा शंकर मिश्र, हरियाणा के प्रांत संपर्क प्रमुख और विनोद कुमार गौतम, अश्वनी गौड़, श्री विनोद और श्री मंजीत (एबीवीपी) से पधारें। प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत जी ने विश्वगुरु और चालीस ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने के लिए स्वावलंबी भारत अभियान की प्रासंगिकता की शुरुआत को बेहतर कदम बताया और उन्होंने छात्रों को स्टार्टअप या किसी बिजनेस आइडिया के लिए आवश्यक सहायता का भी आश्वासन दिया।
मुख्य वक्ता गंगा शंकर मिश्र जी ने कहा कि स्वावलंबी भारत अभियान, देश में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए ठोस कदम उठाने की दिशा में एक सामूहिक पहल है। भले ही आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है, फिर भी बेरोजगारी भारत के आर्थिक विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन हम स्वावलंबी भारत योजना से इसमें सुधार कर सकते हैं। श्री मंजीत ने छात्रों को स्वावलंबी और स्वदेशी बनने की शपथ दिलवाई और कहा कि हमें केवल नौकरी पर निर्भर रहने की मानसिकता को बदलना होगा और हम खुद को रोजगार पैदा करने में सक्षम बनाएं।
विनोद कुमार ने कहा कि भिखारी बनकर नौकरी मांगने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में केवल 18% से 20% नौकरियां ही मौजूद हैं इसलिए हमें खुद को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है। कुलदीप ने स्वावलंबी भारत के महत्व को विस्तार से बताया। आज ही के दिन बी.वोक रिटेल मैनेजमेंट द्वारा विद्यार्थियों के लिए अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान डॉ. रितु मुद्गल, कौशल सहायक प्रोफेसर, विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, दुधोला, पलवल द्वारा दिया गया। व्याख्यान का विषय “ऑनलाइन व्यवसायों की मार्केटिंग मिश्रण प्रथाएँ” रहा। डॉ. रितु मुद्गल ने ऑनलाइन व्यवसायों के वर्तमान परिदृश्य की आवश्यकता के अनुसार विपणन मिश्रण प्रथाओं को रणनीतिक बनाने के महत्व के बारे में बताया और अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी बढ़ती ई-कॉमर्स कंपनियों की जीवन कहानियों पर चर्चा की।
प्रेजेंटेशन के बाद एक इंटरैक्टिव प्रश्न और उत्तर सत्र हुआ। इन तीनों कार्यक्रमों की श्रृंखला को को सफल बनाने में डॉ. शोभना गोयल, डॉ. रेखा सैन, डॉ. सुप्रिया ढांडा, डॉ. पूजा सैनी, सुभाष, डॉ. डिंपल, श्रीमती पूजा, डॉ. रचना कलसन, डॉ. पंकज कुमार, प्रियंका, डॉ. जगवीर और डॉ. पूनम रौतेला आदि का विशेष योगदान रहा। इस कार्यक्रम से प्रथम व्याख्यान में 119 और दूसरे व्याख्यान में 123 विद्यार्थी लाभन्वित हुए।
