
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संचार एवं मीडिया तकनीकि विभाग द्वारा बीएससी विजुअल कम्युनिकेशन और मल्टीमीडिया के विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए महर्षि नारद स्टूडियो में स्केचिंग के विभिन्न रूपों के विषय पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मुख्य वक्ता आर्टिस्ट गौरव रहे। कार्यशाला से पहले विभागाध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने आर्टिस्ट गौरव को उनके स्वागत में एक पौधा भेंट किया।
विभागाध्याक्ष डॉ. पवन सिंह ने अपने स्वागत संबोधन के दौरान सृजन के महत्व और कलाकृति के निर्माण के लिए तकनीकी उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर तकनीकी का है ऐसे में विद्यार्थियों को न सिर्फ थ्यौरी पढानी चाहिए बल्कि साथ – साथ प्रक्टिकल भी करवाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों के हाथों को हुनर मिलेगा। इसी पैटर्न पर चलते हुए संचार एवं मीडिया तकनीकि विभाग समय – समय पर विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यशालाओं को आयोजन करता है जिसमें विशेषज्ञ आकर विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान से रूबरू करवाते हैं।
आर्टिस्ट गौरव ने स्कैचिंग के पीछे की प्रेरणा को सांझा करते हुए कार्यशाला की शुरुआत की। विशेष रूप से उन्होंने 12 स्केचिंग तकनीकों को विस्तार से समझाया और कला की नैतिकता और स्केचिंग में अनुपात के महत्व पर जोर दिया। इतना ही नहीं गौरव ने खुद कई प्रकार की कलाकृति करते हुए छात्रों को भारतीय प्राचीन कला के रूपों से परिचित कराया। कार्यशाला में आगे उन्होंने अपने सभी सिद्धांतों को उदाहरणों के माध्यम से छात्रों के सामने लागू किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भी अपनी रचनाएँ बनाकर इस कार्यशाला में व्यावहारिक रूप से भाग लिया। गौरव ने छात्रों को मौलिकता और परिप्रेक्ष्य के महत्व को समझाते हुए अपनी कार्यशाला का समापन किया।
यह कार्यशाला संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग डीन प्रोफेसर डॉ पूनम सिंगल एवं विभागाध्यक्ष डॉ पवन सिंह के मार्गदर्शन में हुई। कार्यशाला की आयोजक विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनिया हुड्डा रहीं। जे. सी. बोस यूनिवर्सिटी, वाईएमसीए के कुलपति प्रोफेसर एस. के. तोमर और कुलसचिव डॉ मेहा शर्मा ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर बधाई एवं शुभकामनायें देते हुए हुए कहा की भविष्य में भी ऐसे व्यावहारिक ज्ञान के लिए इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन होते रहना चाहिए ताकि मीडिया विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल एक्सपोज़र मिलता रहे।
