
फरीदाबाद, जनतंत्र टुडे / ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल (एएसडीसी) के वार्षिक सम्मेलन (एनुअल कॉन्क्लेव) का सफलतापूर्वक आयोजन होटल हयात रीजेंसी में किया गया। सहयोग, सशक्त, गतिशील और सफल (Collaborate, Empower, Accelerate, and Achieve) थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में मौजूद इंडस्ट्री लीडर्स, पॉलिसी मेकर्स और अन्य को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मौजूद केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास जी आठवले ने कहा कि देश के गिग इकॉनमी वर्कर्स को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि एएसडीसी की ओर से देश के आठ लाख गिग इकॉनमी वर्कर्स को 2030 तक ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए प्रशिक्षित करने का खाका तैयार किया है। प्रशिक्षण में सॉफ्ट स्किल्स, सड़क सुरक्षा पर ज़ोर दिया जाएगा और प्रशिक्षार्थियों को चिकित्सा और बीमा कवरेज प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 2029-30 तक, भारत का ई-कॉमर्स क्षेत्र के डिलीवरी में लगभग 235 करोड़ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि वे इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अवसरों से लाभान्वित हों, जिसमें जीवन बीमा और चिकित्सा कवरेज शामिल हो। एएसडीसी के सहयोग से आठ लाख गिग वर्कर्स को ट्रेनिंग मिलने से उन्हें रोजगार के अवसर मिलेंगे। युवाओं, महिलाओं और दिव्यांग सहित एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों का उत्थान होगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एएसडीसी के प्रेसिडेंट एफ आर सिंघवी ने ऑटोमोटिव उद्योग की चुनौतियों का समाधान करने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ऑटोमोटिव क्षेत्र विकसित होता है, कुशल पेशेवरों की आवश्यकता बढ़ जाती है। कौशल और ज्ञान से युवाओं को सशक्त बनाकर इंडस्ट्री की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।
एएसडीसी के वाइस प्रेसिडेंट विंकेश गुलाटी ने अपने भाषण में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह से कुशल कार्यबल की आवश्यकता बढ़ रही है। यहीं से स्किल ट्रेनिंग और ASDC की भूमिका सर्वोपरि हो जाती है। हमारे ऑटोमोटिव उद्योग का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम व्यक्तियों और संस्थाओं दोनों को सशक्त बनाने के लिए मिलकर कितने अच्छे तरीके से काम करते हैं। सहयोग के माध्यम से, हम कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भारत वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बना रहे। कॉन्क्लेव में सीएसआर सहयोग के जरिये कौशल विकास पर पैनल चर्चाएं भी हुईं, जिसमें बजाज, टोयोटा और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।




