
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय बल्लभगढ़ के स्वच्छता सेनानी क्लब ने स्वच्छता जागरूकता सात दिवसीय कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया। संस्थान/बस स्टैंड अस्पताल परिसर को साफ रखने के लिए इस स्वच्छता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में अधिकतम संख्या में छात्रों ने भाग लिया।
वे स्वच्छता अभियान, स्लोगन और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, पीपीटी प्रतियोगिता, स्वच्छता जागरूकता रैली, बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट मेकिंग वर्कशॉप जैसे विभिन्न कार्यक्रमों में भी अपना समय देते हैं और स्वच्छता मिशन के बारे में जनता को जागरूक भी करते हैं। प्रदर्शनी का आयोजन प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया है। उन्होंने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा हर काम के लिए सरकार पर निर्भर रहना जरुरी नहीं है। व्यक्ति की मानसिकता पर ही निर्भर करता है कि वह कैसे रहना चाहता है। माहौल से भी सोच में बदलाव आता है। क्यो कि देखा गया है कि घर के माहौल पर ही बच्चे की सोच उभरती है। वही आदत उसके अंदर होगा। उन्होंने कहा कि स्वयं स्वच्छ रखने के बाद ही दूसरे को स्वच्छ रहने की सलाह दी जा सकती है।
प्रदर्शनी का सफलतापूर्वक समन्वयन डॉ. रेखा सेन और सुश्री मोहिनी वर्मा ने किया। स्वच्छता सेनानी क्लब के छात्रों ने अपशिष्ट पदार्थ जैसे खाद, प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग करके प्लास्टिक के बर्तन, अखबारों और पॉलीबैग का उपयोग करके सजावटी सामान का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाईं। प्रदर्शनी का विषय अपशिष्ट प्रबंधन था।वेस्ट मैनेजमेंट कचरे के पुन: इस्तेमाल का तरीका है।
इसमें कचरे को नष्ट करने की बजाय इसे रिसाइकिल किया जाता है। हमारे देश में फिलहाल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए पर्याप्त तकनीक नहीं है और न ही इसे लेकर जागरूकता है, लेकिन कचरा पैदा करने में अग्रणी देश होने की वजह से यह जरूरी होता जा रहा है कि हम इसके बारे में जानें। कचरा बढ़ने की प्रमुख वजह जनसंख्या वृद्धि और तेज आर्थिक विकास है। देश में पैदा होने वाला लगभग 80% कचरा कार्बनिक उत्पादों, गंदगी और धूल कर मिश्रण होता है।घरों, शहरों व फैक्टरियों से निकलने वाले कूड़े का सही तरीके से प्रबंधन न हो पाना एक बड़ी समस्या है।
हर देश इसकी समस्या से ग्रसित है। लाख प्रयास के बाद भी इस क्षेत्र में उतना काम नहीं हो पा रहा, जितनी जरूरत है। केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान कार्यक्रम सहित कई एनजीओ इस समस्या से निजात पाने में लगे हैं। इसके लिए वे घर-घर जाकर कूड़ा एकत्र कर रहे हैं। इस कूड़े में जो कुछ ज्वलनशील है उससे एनर्जी तथा जो सड़ने वाला है, उससे वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है।
आज भी लोग जागरूकता के अभाव में कूड़ा अथवा अपशिष्ट जहां-तहां फेंक देते हैं। इससे उनका प्रबंधन नहीं हो पाता, जबकि कई एनजीओ उन्हें इस कूडे़ के एवज में पैसा भी दे रहे हैं। वेस्ट मैनेजमेंट तीन तरह से होता है। पहले में जमीन में गड्ढा खोदकर कचरे को गाढ़ना। दूसरा तरीका कचरे को एक जगह इकट्ठा कर उसे जलाना और तीसरे में रिसाईकिल कर कचरे का पुन: उपयोग।
यह तरीका सबसे ज्यादा लाभदायक है क्योंकि इसमें हम काम में लाई जाने वाली दूसरी चीजें बना सकते हैं।इन सभी बातों को इस प्रदर्शनी में समझाया गया है







