
फरीदाबाद, जनतंत्र टुडे / “शोध पत्र लेखन एवं प्रकाशन” पर
एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ऑनलाइन आयोजित की गई, जिसका आयोजन
“राष्ट्रीय रसायन विज्ञान सप्ताह” के उपलक्ष्य में केमिकल सोसाइटी के सहयोग से
अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) प्रकोष्ठ के बैनर तले रसायन विज्ञान विभाग
द्वारा किया गया। कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन अग्रवाल कॉलेज के
अध्यक्ष श्री देवेंद्र कुमार गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन और अग्रवाल कॉलेज के
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ संजीव कुमार गुप्ता की देखरेख में किया गया।
कार्यशाला के संसाधन व्यक्ति डॉ राज कुमार भारद्वाज, मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष, सेंट स्टीफन
कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत थे। कार्यक्रम का उद्घाटन वक्ता के
औपचारिक स्वागत के लिए उन्हें वर्चुअल गुलदस्ता भेंट करके किया
गया।कार्यवाहक प्राचार्य डॉ संजीव कुमार गुप्ता को रसायन विभागाध्यक्ष और
संयोजक, अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी), डॉ प्रियंका सेहरावत द्वारा एक
पौधा भेंट किया। इस कार्यशाला में विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि से छात्रों और
संकायों सहित 100 से अधिक प्रतिभागी शोध पत्र लेखन प्रक्रिया की अपनी समझ
को बढ़ाने के लिए एक साथ आए। डॉ प्रियंका सेहरावत ने वक्ता का संक्षिप्त
परिचय दिया और साथ ही शोध और उन्नत दिमाग के साथ काम करने के कुछ
बुनियादी विचार दिए।
कार्यक्रम के संसाधन व्यक्ति ने शोध पत्र लिखने के लिए
आवश्यक प्रत्येक अवधारणा को समझाया। उन्होंने साहित्य सर्वेक्षण, विधि अनुभाग
से संबंधित तथ्यों को शामिल किया और एक शोध पत्र में सचित्र प्रस्तुति के
महत्व को शामिल किया। उन्होंने अत्यंत सावधानी के साथ सार, परिणाम और
निष्कर्ष लिखने पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने समझाया कि कैसे संदर्भ और
उद्धरणों का उचित लेखन गुणवत्ता वाले पेपर के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने शोध
पत्र लिखने से पहले, दौरान और बाद के प्रत्येक पहलू को समझाया। बाद में उन्होंने
शोध पत्र लिखने के लिए विभिन्न टेम्पलेट के बारे में जानकारी दी। अंत में, उन्होंने
प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रेरित किया और अच्छे परिणाम के लिए
उत्पादक टीम वर्क पर जोर दिया। उन्हें प्रकाशन, पेटेंटिंग और कॉपीराइटिंग के बारे
में भी जानकारी मिली। यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा क्योंकि प्रतिभागियों की
संख्या और उनकी भागीदारी ने ही इसकी सफलता की कहानी बयां कर दी जो
रसायन विज्ञान विभाग की सामूहिक मेहनत का नतीजा था। कार्यक्रम का समापन
सुश्री मानशी त्यागी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।




