
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराय ख्वाजा फरीदाबाद में प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में सराय ख्वाजा क्लस्टर में एफ एल एन के लक्ष्यों को पूर्ण करने पर एक विशेष मीटिंग में कार्य योजना पर सभी प्रतिभागियों को अवगत करवाया गया। कार्यक्रम में प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में सी आर सी के सभी विद्यालयों के मुख्य शिक्षक और ए बी आर सी उपस्थित रहे। एफ एल एन के उद्देश्यों एवम मूलभूत साक्षरता और अंकज्ञान क्या है आदि के लक्ष्य प्राप्त करने बारे विचार रखे गए। एफ एलएन शिक्षा प्रणाली का लक्ष्य 2026-27 तक मूलभूत साक्षरता और अंकज्ञान प्राप्त करना है जहां ग्रेड 3 तक हर बच्चा समझ के साथ पढ़ सकता है, लिख सकता है, बुनियादी गणितीय संचालन कर सकता है और बुनियादी जीवन कौशल सीख सकता है।
अनुसंधान से पता चलता है कि अच्छी गुणवत्ता वाली प्रारंभिक शिक्षा, प्रारंभिक बचपन शिक्षा कार्यक्रम ड्रॉपआउट और पुनरावृत्ति की संभावना को कम करने में मदद करते हैं और शिक्षा के सभी स्तरों पर परिणामों में सुधार करते हैं। मूलभूत शिक्षा के लिए सीखने के परिणामों को 3 तीन विकासात्मक लक्ष्यों में विभाजित किया गया है पहले लक्ष्य में स्वास्थ्य और भलाई, दूसरे लक्ष्य में प्रभावी संचारक और तीसरे लक्ष्य में सम्मिलित शिक्षार्थी। प्रत्येक लक्ष्य की प्रमुख दक्षताओं की भी पहचान की गई है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने बताया कि कक्षा 3 को विभक्ति बिंदु माना जाता है जिसके द्वारा बच्चों से पढ़ना सीखने की अपेक्षा की जाती है ताकि वे उसके बाद सीखने के लिए पढ़ सकें। वे बच्चे जो इन बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल को प्राप्त करने में विफल रहते हैं उन्हें बाद के वर्षों में पकड़ना मुश्किल होता है और स्कूल छोड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। एफ एल एन में पढ़ने और लिखने की क्षमता और संख्याओं के साथ बुनियादी संचालन करने की क्षमता अर्थात एफएलएन एक आवश्यक आधार है और सभी भविष्य की स्कूली शिक्षा और आजीवन सीखने के लिए एक अनिवार्य शर्त है।
आधारभूत शिक्षण अध्ययन ग्रेड 3 स्तर के बच्चों के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं में समझ के साथ पढ़ने में मानदंड स्थापित करने में सक्षम होगा । प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने बताया कि यह एक निश्चित गति से, सटीक और समझ के साथ आयु उपयुक्त ग्रंथों एवम ज्ञात और साथ ही अज्ञात को पढ़ने की क्षमता और मूलभूत संख्यात्मक कौशल का भी आकलन करेगा। लंबे समय से भारतीय शिक्षा प्रणाली में रटने सीखने को मुख्य समस्या के रूप में देखा गया है तथा तथ्यों की गैर संदर्भित पुनरावृत्ति, बिना प्रश्न के पाठ करना और आलोचनात्मक सोच की सामान्य कमी सीखने के समग्र रूपों में बाधा है। एक ऐसी जांच प्रणाली जो एफएलएन महारत के आधार पर प्रदर्शन का न्याय करती है और असफल परिणामों से बचने के लिए स्कूलों को विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया में तेजी लाएगी। यह वास्तव में मानकीकृत आकलन में असफल होने का डर है जो सीखने को कायम रखता है और परीक्षा के लिए शिक्षण का मार्ग प्रशस्त करता है जहां शिक्षण, संसाधन और समय सभी सीखने से केवल मूल्यांकन की महारत की ओर पुनर्निर्देशित किए जाते हैं।
इस अवसर पर प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा और ए बी आर सी नीलम ने सभी अध्यापकों को छात्रों की वर्क बुक, कंपटेंसी लेवल, कौशल पास बुक, डेली डायरी, टी एल एम एवम संपर्क टी वी का उचित उपयोग, रीडिंग कॉर्नर स्थापित करने, एक्टिविटी रजिस्टर, छात्रों का समूहीकरण एवम वर्गीकरण सहित सभी बिंदुओं पर उचित प्रगति करने के लिए मोटिवेट किया।







