
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / मेट्रो कैंसर इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद द्वारा रेडियो महारानी के सह-प्रायोजन में आयोजित प्रेरणादायक कार्यक्रम “योध्दा अवार्ड्स 2025” का आयोजन एक भावनात्मक और ऊर्जावान माहौल में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन उन महिला योद्धाओं को समर्पित था जिन्होंने स्तन कैंसर (Breast Cancer) जैसी गंभीर बीमारी से साहस, विश्वास और उम्मीद के साथ लड़ाई लड़ी और विजेता बनकर समाज के लिए प्रेरणा बन गईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन समारोह में मुख्य अतिथि रहीं डॉ. पुनम लाल, निदेशक – मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “हर महिला में असीम शक्ति होती है। कैंसर जैसी चुनौती को मात देने वाली ये महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा हैं। हमें इनकी कहानियों से उम्मीद और जज़्बे की सीख मिलती है।”
इस अवसर पर डॉ. सना तारिक, वाइस प्रेसिडेंट – मेट्रो हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने स्वागत संबोधन देते हुए कहा –
“मेट्रो कैंसर इंस्टीट्यूट सिर्फ इलाज का स्थान नहीं, बल्कि उम्मीद और हौसले का प्रतीक है। आज हम उन योध्दाओं का सम्मान कर रहे हैं जिन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि अपनी मुस्कान से जीवन को फिर से जीना सीखा।”
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. मंजीन्दर भट्टी, डिप्टी मेडिकल डायरेक्टर एवं डायरेक्टर – मेट्रो कैंसर इंस्टीट्यूट, डॉ. सुमंत गुप्ता, डायरेक्टर – मेट्रो कैंसर इंस्टीट्यूट,डॉ. शिवम वत्सल, डायरेक्टर एवं हेड – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जरी (Unit-II) एवं डॉ. पुनीत नागपाल, डायरेक्टर एवं हेड – रेडिएशन ऑन्कोलॉजी (Unit-II), उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक और भावनात्मक क्षण रहा “योध्दा रैंप वॉक” — जिसमें स्तन कैंसर से विजयी महिलाओं ने आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ मंच पर कदम रखे। उनकी चाल में हिम्मत थी, आँखों में उम्मीद की चमक, और चेहरे पर जीवन का उल्लास। उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इन योद्धाओं का उत्साह बढ़ाया।
पूरे आयोजन का संचालन संवेदनशील और ऊर्जावान शब्दों के साथ हुआ, जिसमें कैंसर सर्वाइवर्स को “योध्दा अवार्ड्स” से सम्मानित किया गया और उनकी प्रेरणादायक कहानियाँ साझा की गईं।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और डॉक्टरों ने हाई-टी के दौरान योध्दा महिलाओं के साथ बातचीत की और उनके साहस को सराहा।
मेट्रो कैंसर इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद एवं रेडियो महारानी द्वारा सह-प्रायोजित यह आयोजन न केवल एक सम्मान समारोह था, बल्कि यह हिम्मत, उम्मीद और नई जिंदगी के जश्न का प्रतीक बन गया |
कैंसर ने लड़ाई शुरू की थी, लेकिन इन योध्दाओं ने उसे खत्म किया।”
इन योध्दा महिलाओं ने यह साबित किया — जहां विश्वास है, वहां जीत तय है!






