
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है और एक्यूआई का आंकड़ा 400 को पार कर चुका है जबकि पीएम 2.5 तथा पीएम10 भी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं। वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य के लिए बढ़ते संकट के मद्देनज़र, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने शहरवासियों को सावधानी बरतने का परामर्श दिया है। इस बीच, हवा में लगातार छायी धुंध (स्मॉग), कोहरे (फॉग) और हवा की बेहद सुस्त गति तथा हवा में मौजूद अधिक नमी की वजह से हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा काफी बढ़ गई है। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों का कहना है कि आपातकालीन मामलों में 15% तेजी दर्ज हुई और सांस की तकलीफ, सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न, आंखों में जलन तथा पहले से मौजूद फेफड़ों एवं हृदय की परेशानियां भी और गंभीर हुई हैं।
डॉ कृष्ण कुमार राय – इमरजेंसी हेड, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “पहले से फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त मरीजों की तकलीफ इन दिनों बढ़ जाती है, और जब वे खराब हालत में अस्पताल पहुंचते हैं तब तक रेस्पिरेटरी फेलियर का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जिनमें हवा की खराब क्वालिटी और भारी स्मॉग की मात्रा की वजह से मरीजों की सेहत पर खतरा मंडराने लगा है। हम अस्पताल आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होती देख रहे हैं जिन्हें सांस लेने में बेहद तकलीफ हो रही है, ऑक्सीजन लेवल में भारी गिरावट देखी गई है, सीने में बेचैनी, चक्कर आने, या सांस संबंधी पुरानी तकलीफ अचानक बिगड़ने लगी है। कई मामलों में, ये कंडीशन पहले ही खतरनाक होती है, ऑक्सीजन स्तर में काफी कमी हो जाती है और दिल पर दबाव बढ़ जाता है। ये स्थितियां तेजी से गंभीर बन सकती हैं, इसलिए बिना देरी किए मेडिकल सहायता लेनी चाहिए। प्रदूषण बढ़ने से सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि घने कोहरे की वजह ट्रैवल करना बेहद असुरक्षित हो जाता है।”
डॉ रवि शेखर झा, डायरेक्टर एंड यूनिट हेड, पल्मोनोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “मौजूदा वायु गुणवत्ता फेफड़ों/सांस संबंधी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। हवा में मौजूद प्रदूषण के बारीक कण सांसों के साथ फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं और अस्थमा, सीओपीडी तथा सांस के अन्य कई रोगों का कारण बनते हैं। जिन लोगों को पहले से फेफड़ों संबंधी तकलीफें नहीं हैं, उन्हें भी सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है, गले में बेचैनी, या फेफड़ों की क्षमता में कमी आ सकती है। जिन लोगों को पहले से अधिक जोखिम है, उन्हें इन दिनों बाहर नहीं जाना चाहिए।”
डॉक्टरों की सलाहः
- सवेरे और देर शाम के समय आउटडोर गतिविधियों से बचें क्योंकि इस दौरान प्रदूषण तथा धुंध सर्वाधिक होता है
- घर से बाहर निकलने से पहले प्रतिदिन एक्यूआई और अन्य संबंधित अपडेट्स देखें
- घरों से बाहर सर्टिफाइड एन95 या समान गुणवत्ता के मास्क का प्रयोग करें
- प्रदूषण के पीक घंटों के दौरान खिड़कियां बंद रखें और घरों के भीतर स्वच्छ हवा बनाए रखें
- पानी का उचित मात्रा में सेवन करें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो और फलों एवं सब्जियों वाले संतुलित भोजन का सेवन करें
- धूम्रपान से बचें तथा परोक्ष धूम्रपान से भी दूर रहें
- नियमित रूप से सांस और हृदय संबंधी दवाओं का सेवन करते रहें
- बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा हृदय रोगियों को यथासंभव घरों के अंदर ही रखें
- घने कोहरे में ट्रैवल करने से यथासंभव बचें, केवल बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें
- कम रोशनी की स्थिति में धीमी रफ्तार से वाहन चलाएं, पर्याप्त दूरी बनाकर रखें और हेडलाइट तथा फॉग लाइट का प्रयोग करें
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कारपूलिंग करें ताकि सड़कों पर ट्रैफिक कम रहे
- जैसे ही सांस लेने में कठिनाई, सीने में बेचैनी, चक्कर आने की समस्या, भ्रम की स्थिति महसूस हो या लक्षणों में किसी प्रकार की गंभीरता देखें अथवा दुर्घटनाग्रस्त हों, तो तत्काल मेडिकल सहायता लें
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड के बारे में
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड भारत में अग्रणी एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता है। कंपनी के हेल्थकेयर वर्टिकल्स में मुख्यतः अस्पताल, डायग्नॉस्टिक्स तथा डे केयर सेवाएं शामिल हैं। वर्तमान में, कंपनी देशभर के 11 राज्यों में कुल 33 हेल्थकेयर सुविधाओं (जिनमें जेवी और ओ एंड एम शामिल हैं) का संचालन करती है। कंपनी के नेटवर्क में 5,700 से अधिक ऑपरेशनल बेड्स (ओ एंड एम समेत) तथा 400 डायग्नॉस्टिक्स लैब्स शामिल हैं।






