फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / नई दिल्ली:— ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरे से पूरी दुनिया चिंतित है। भारत ने इसी खतरे को देखते हुए 2032 तक 600 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य रखा है। बिजली उत्पादन के दिशा में कदम उठाए जा रहे है, लेकिन इसे दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने की व्यवस्था करना उससे अधिक महत्वपूर्ण है। वरुण भाटिया, वाइस प्रेसिडेंट, ईएसएससीआई ने बताया कि इसके लिए सबसे जरूरी है ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार। क्योंकि ट्रांसमिशन टावर और लाइनों के बिना बिजली आपूर्ति संभव ही नहीं है। वास्तव में, ट्रांसमिशन लाइन आधुनिक भारत की लाइफ लाइन (जीवनरेखा) हैं। एक ऐसा बुनियादी ढांचा, जो आम तौर पर हमारी नजरों से छिपा रहता है।
भारत की बिजली आपूर्ति की रीढ़: बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण – ये तीनों मिलकर भारत की ऊर्जा प्रणाली को सुचारु रूप से चलाते हैं। ट्रांसमिशन नेटवर्क का काम होता है – हजारों किलोमीटर दूर से पैदा हुई बिजली को बेहद हाई वोल्टेज पर लोगों तक पहुंचाना। 2025 की शुरुआत तक, भारत में 220 kV और उससे ऊपर की ट्रांसमिशन लाइनें 4.92 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) फैली हुई हैं, और ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता 1,269 GVA तक पहुँच गई है – जो दुनिया के सबसे बड़े सिंक्रोनाइज़्ड ग्रिड में से एक है। इंटीग्रेटेड एकल ग्रिड अब 1,18,740 मेगावाट तक बिजली का आदान-प्रदान करने में सक्षम है। इसी के चलते 2014 में 4.2% की बिजली कमी अब 2025 में घटकर मात्र 0.1% रह गई है। भारत अब नेट पावर एक्सपोर्टर बन गया है।
2032 का विज़न है जरूरी: 2032 तक भारत को ₹9 लाख करोड़ का निवेश ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में करना होगा। तभी नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान (NEP) – ट्रांसमिशन, 2024 के अनुसार 2032 तक ट्रांसमिशन नेटवर्क को 6.48 लाख सर्किट किलोमीटर, ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता को 23.45 लाख मेगावोल्ट एम्पीयर (MVA) और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट की क्षमता को 66,750 मेगावाट तक बढ़ाया जाएगा। सरकार ने इस क्षेत्र को निवेश के लायक बनाने के लिए पॉलिसी लेवल पर सुधार किए हैं। जल्दी मंजूरी, पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप मॉडल, और राज्यों का सहयोग जरूरी रहा है। निजी निवेश से तकनीक, गति और लागत – तीनों में सुधार हुआ है। नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी और डिजिटल समाधानों के साथ निजी क्षेत्र की भूमिका और भी अहम हो जाएगी।
जमीन पर चुनौतियां बहुत: ट्रांसमिशन और बिजली के क्षेत्र में विकास काफी हुआ है, लेकिन चुनौतियां भी गंभीर हैं। वर्ष 2024-25 में केवल 8,830 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनें जोड़ी गईं जो पिछले एक दशक में सबसे कम हैं। सबसे बड़ी समस्या है राइट-ऑफ-वे यानी जमीन अधिग्रहण। भूमि अधिग्रहण में अक्सर लोगों का विरोध होता है, क्योंकि ज़्यादातर लोगों को पूरी जानकारी नहीं होती। कई लोग अभी भी सोचते हैं कि मुआवज़ा पुराने नियमों के हिसाब से मिल रहा है। इसके अलावा, पर्यावरण की मंजूरी मिलने में देरी भी एक बड़ी वजह है। इसी को देखते हुए जून 2024 में राइट-ऑफ-वे नीति में संशोधन किया गया और मार्च 2025 में नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, ताकि भूमि मालिकों को बेहतर मुआवजा और प्रक्रिया में पारदर्शिता मिल सके।
आर्थिक विकास का ईंधन है बिजली ट्रांसमिशन: हर उद्योग, हर स्टार्टअप, हर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को बिजली चाहिए। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से लेकर पुणे और हैदराबाद के टेक पार्क तक – इस जरूरत को पूरा कर रही हैं ये ट्रांसमिशन लाइनें। “मेक इन इंडिया” और MSME सेक्टर की तेज़ी से बढ़ती मांग के बीच, इंटरस्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम ने फरवरी 2025 तक 2.13 लाख सर्किट किलोमीटर के नेटवर्क से पूरे देश को जोड़ा है।
ट्रांसमिशन लाइनें केवल शहरों की जरूरत नहीं पूरी करतीं – ये गांवों में विकास की रफ्तार भी बढ़ाती हैं। सौभाग्य योजना के तहत जब लाखों घरों में बिजली पहुंची, उसमें ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम के गांवों तक लाइनें पहुंचीं – जिससे वहां स्कूलों में स्मार्ट क्लास, स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक उपकरण और खेतों में पंप व मोटर मुमकिन हो सका। ग्रामीण भारत में बिजली जीवन बदलने वाला संसाधन है। ट्रांसमिशन लाइनें भले ही अखबारों की सुर्खियों में कम दिखें, लेकिन ये भारत के परिवर्तन की सबसे बड़ी वजह हैं। ये न केवल घरों में उजाला लाती हैं, बल्कि डिजिटल क्रांति, स्मार्ट शहरों, औद्योगिक विकास और गांव की आशाओं को ऊर्जा देती हैं। भारत जब $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, तब यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि हर नागरिक तक बिजली पहुंचे – चाहे वह किसी भी क्षेत्र, जाति या पृष्ठभूमि का हो। इसके लिए जरूरी है देश के हर क्षेत्र में ट्रांसमिशन लाइनें बिछती जाएं। और, अभी भी यह तारें देश के नागरिकों के सपनों, समानता और सफलता को ऊर्जा दे रहा है। यही भारत के उज्जवल भविष्य की असली शक्ति है।






